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फरवरी 2024

1945 से लगातार प्रकाशित साहित्य और संस्कृति का मासिक




आगामी अंक




इस अंक में

प्रसंगवंश

हम भारतवासी वास्तव में धन्य हैं जो हमने इस विविधता से परिपूर्ण देश में जन्म लिया है। जहाँ एक ओर भारत ‘अनेकता में एकता’ का जीवन्त उदाहरण प्रस्तुत करता है वहीं इसे ‘ऋतुओं का देश’ भी कहा जाता है। वैसे तो हमारे देश में छह ऋतुएँ हैं लेकिन मुख्य रूप से चार का महत्व अधिक है– वसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु और शरद ऋतु। उत्तर भारत तथा समीपवर्ती देशों की छह ऋतुओं में से एक ऋतु है- वसंत, जो फ़रवरी से अप्रैल के मध्य इस क्षेत्र में अपना सौन्दर्य बिखेरती है। यही वह समय है जब प्रकृति अपना रंग बदल रही होती है, जब पौधों पर नई कोंपलें फूटकर निखर रही होती हैं।

प्रमुख आलेख

हिन्दी आलोचक कमला प्रसाद की इतिहास दृष्टि

लेखक: अजेय पाण्डेय

इतिहास में समाज की भूमिका के बीच सामाजिक चेतना एक ऐसा कारक है जो पराएपन या कुंठा की भावना मनुष्य में घर नहीं करने देता है। यह चेतना मनुष्य के भीतर सहजता, रचनात्मकता, स्वतन्त्रता मूल्यों को मौजूद रखती है। इसी के होने से मनुष्य या उसके व्यक्तित्व के होने का संकेत देता है। यदि यह लुप्त हो जाए तो श्रमिक वस्तु या उत्पाद-सा रह जाता है। ऐसे में वह किसी भी निर्णय की स्थिति में नहीं जा पाता है।

विशिष्ट/फोकस/विशेष आलेख

कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग को शृद्धांजलि
कैनवास से बड़ी शिख़्सयत

लेखक: - सुधा रानी तैलंग

  जाने-माने कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग की इस माह जयंती एवं पुण्य तिथि है। संस्कृत प्राध्यापक और सािहत्यकार सुधा रानी तैलंग ने अपने छोटे भ्राता और कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग के बचपन की यादों से लेकर परिपक्व कार्टूनिस्ट बनने तक के सफ़र को इस संस्मरणात्मक आलेख में प्रस्तुत किया है। प्रश्न : आप जब सागर विश्वविद्यालय में स्नातक के छात्र थे, तब आपने ‘समवेत’ पत्रिका निकाली थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण लेखकों की रचनाएँ छपी थीं। इस पत्रिका को निकालने की प्रेरणा आपको कैसे मिली?

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April 2023

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अजकल आर्टिकल अगस्त

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